पशु कल्याण समिति, राजस्थान (AWS Rajasthan) एक सामाजिक संस्था है, जो पशुओं, पक्षियों एवं पशुपालकों के संरक्षण, उपचार और जागरूकता के लिए कार्य कर रही है।
राजस्थान प्रदेश में पशु कल्याण समिति एक पशु कल्याण कार्यकर्ताओं का संगठन है। जिसे राजस्थान संस्था पंजीकरण अधिनियम, 1958 (अधिनियम संख्या 28) के अन्तर्गत राजस्थान सरकार से 20 अप्रैल 1996 को पंजीकृत करवाकर वन्य जीवों, पशुओं, पशु पालकों एवं पशु चिकित्सा अधिकारियों/कर्मचारियों के उत्थान एवं कल्याण के लिए कार्य कर रही है। पशु कल्याण समिति प्रदेश स्तर पर वन्य जीवों, पशुओं, पशु पालकों एवं पशु चिकित्सा अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए प्रतिनिधि संस्था के रूप में कार्यरत है। इस संस्था द्वारा सड़क दुर्घटना में घायल हुए पशुओं को चिकित्सा सुविधा क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के अनुसार उपलब्ध करवाने एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा शिविरों का भी आयोजन करवाया जाता है।पशु कल्याण समिति के पशु कल्याण कार्यकर्ताओं, गौ सेवकों, गौ रक्षकों द्वारा जीव-जन्तुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए पुलिस सहयोग से वन्य जीवों, गायों तथा अन्य पशुओं को क्रूरतापूर्वक लदान कर ले जाने वाले वाहनों को पकड़कर दोषी व्यक्तियो के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम 1960 की विभिन्न धाराओं में दर्ज प्रकरणों की मॉनिटरिंग कर कानूनी कार्यवाही करवाती है, साथ ही पशु कल्याण समिति द्वारा जंगली जीवो बंदर, साँप, नवेला आदि का खेल तमाशा दिखाने वालो के खिलाफ भी वन्य जीव अधिनियम 1972 के तहत विभिन्न धाराओं में दर्ज प्रकरणों की मॉनिटरिंग कर कानूनी कार्यवाही करवाती है। संस्था द्वारा ग्रामीण क्षेत्रो में भी भ्रमण कर पशुओ पर दूध निकलने के लिए इस्तेमाल किये जा रहे इंजेक्शन ऑक्सीटोसिन को पकड़कर भी कानूनी कार्यवाई करवाने के साथ-साथ स्कूलों में सैमिनारो का आयोजन कर बच्चो को पशु-प्रेम व पशु-कल्याण के बारे में शिक्षा दी जाती है। पशु-कल्याण के कार्यो को मध्यनजर रखते हुए पशु कल्याण समिति द्वारा सड़को पर आवारा घूम रही गायो को हरा चारा डालने के साथ-साथ उन्हें लोगो को गोद लेने के लिए भी प्रेरित करने व सड़क दुर्घटना में घायल हुए जानवरों को नजदीकी गोशाला में शरण दिलवाई जाती है। पशु कल्याण समिति द्वारा अवैध रूप से चल रहे मीट-की दुकानों को बंद करवाना व ग्रामीण क्षेत्रो में सैमिनारो का आयोजन कर खेतो में फसल बिजाई के समय जहरीली दवाइयों का इस्तेमाल ना कर देशी खाद प्रयोग करने के लिए जागृत किया जाता है।